Sunday, 3 April 2016
Sunday, 27 March 2016
Shayari Urdu
शक्ल-ए-सूरत से पर; मैं भी तो कुछ कम नही ।
नफ़रत से ही सही पर देखती तो है मुझको तू,
अब तो तेरी रुसवाई में भी वो दम नही ।
दिल न तोङेंगे ये कह के फ़ेर लेती है तू निगाहें,
क्या है फ़ितरत मे तेरी गर ये सितम नही ।
तेरी नाज़ो को इबादत समझते रहे हम,
अरे कल देखा था गैर के साथ अब कोइ भरम नही ।
क्यों करे तकिये गीले याद में तेरे,
जब कि तेरे खयालातों मे ही हम नही ।
छोड़ कर चली जा मुझे तू बेशक,
थाम ले गैर का हाथ ।
लाखों हसिनाए हैं राहों मे,
अब तो तेरे जाने का भी ग़म नही ।
- सौरभ राय (Saurabh Roy)
- सौरभ राय (Saurabh Roy)
Sunday, 6 March 2016
Wednesday, 3 February 2016
Sunday, 24 January 2016
Inspirational Shayri
क्या हुआ अगर अभी थके नज़र आ रहे हैं?
मैदान-ए-जंग में खुद को उतारेंगे फिर कभी|
गफलत में मत रहना की ठण्डे पर गए हैं हम;
अपने लहू की धार को उबालेंगे फिर कभी|
दो कदम आगे क्या निकल गए हमसे नज़र मिलाने लगे?
ज़िंदगी के हर मोड़ पर तुमको पछारेंगे फिर कभी|
मेरे बदन के चन्द खरोंचों पे इतरा लो जितना इतराना है;
लहूलुहान तुम्हे कर के हुंकारेंगे फिर कभी|
- सौरभ राय (Saurabh Roy)
- सौरभ राय (Saurabh Roy)
Wednesday, 20 January 2016
Sunday, 17 January 2016
Wednesday, 13 January 2016
Sunday, 10 January 2016
Hindi Shayari
डूब कर काम में कामिनी को भूल जाऐं जब;
आख़िर क्यों ख़फा न हो हमसे वो फिर ?
फ़ुर्सत के पलों में भी फ़ुर्सत न निकाल पायें जब;
आख़िर क्यों ख़फा न हो हमसे वो फिर ?
रूठे रहे हमसे वो और हम उनको माना न पाए जब;
आख़िर क्यों ख़फा न हो हमसे वो फिर ?
उन्हें तो हजारों बार समझा दिया है अब तक हमने,
मगर खुद को ही नही समझा पाते हैं हम अब;
आख़िर क्यों ख़फा न हो हमसे वो फिर ?
- सौरभ राय (Saurabh Roy)Wednesday, 6 January 2016
Subscribe to:
Posts (Atom)









